How to make Clothes Drying Machine | Small Scale Business Guide in Hindi

ऐसे घर जैसे बहुमंजिला इमारतों में बने फ्लैट इत्यादि, जहाँ खुले स्थानों का अभाव होता है वहां कपडे सुखाना भी एक समस्या है। साथ ही जब धूप न निकले तो हर किसी के लिए यह एक बड़ी परेशानी है। ऐसे में आधुनिक परिवारों में कपड़े सुखाने की मशीनें clothes drying machine तेजी से लोकप्रिय होती जा रही हैं। इन मशीनों से रेशमी, सूती इत्यादि कपड़े मात्र पांच मिनट में ही सूख जाते हैं, इस कारण ड्राईक्लीनर्स, लौंड़्री, अस्पतालों होटलों, होस्टलों, आदि जगह इन मशीनों का बहुत प्रयोग होता है। पिछली Posts में हमने Washing Machine, Geyser, Desert Cooler निर्माण उद्योग के बारे में जाना था। आज हम जानेंगे कि किस प्रकार कपड़े सुखाने की मशीनों के निर्माण का उद्योग किया जा सकता है।

उद्योग के लिए भवन, मशीनें, पूंजी व लाभ (Investment & Profile)

cloths drying machine

ड्राइंग मशीन बनाने के लघु उद्योग के लिए 200 से 300 वर्ग मीटर की फैक्ट्री तथा 15 हॉर्स पावर विद्युत शक्ति की आवश्यकता पड़ती है। सभी मशीने वह उपकरण लगभग 1एक लाख रुपये में आ जाते हैं और दो तीन लाख रुपए कार्यकारी पूंजी के रूप में चाहिए। इस प्रकार फैक्ट्री के स्थान के अतिरिक्त 3-4 लाख रुपए लगा कर आप 10-12 मशीनें प्रतिदिन बना सकते हैं। इतने उत्पादन के लिए तीन चार कारीगर एक इलेक्ट्रिशियन व 6-7 सहायकों की आवश्यकता होगी। दो गुना तक उत्पादन बढ़ाने के लिए आपको केवल अधिक कच्चे माल और सहायकों की आवश्यकता पड़ेगी मशीनें वह मिस्त्री इतने ही पर्याप्त रहेंगे।

32 Ways to Earn Money Online without Investment >>

लोहे अथवा धातु की चद्दरें काटने वाली शेयरिंग या कटिंग मशीन, गोल आकार देने के लिए रोलिंग मिल, हैवी पावर प्रेस, वेल्डिंग प्लांट तथा स्प्रे पेंटिंग यूनिट इस उद्योग में काम आने वाली मुख्य मशीनें हैं। और यह सभी मशीनें लगभग एक लाख रुपए में आ जाती है इसके अतिरिक्त रंग करने के बाद मशीनों का रंग पकाने के लिए एक भट्टी बनवानी पड़ती है। पिछली पोस्ट में हमने इसका विस्तार से वर्णन किया है। इसके अतिरिक्त लोहे वह बिजली के काम आने वाले सभी हाथ के औजारों की आवश्यकता पड़ती है। यह सब मशीनें वही है जो वाशिंग मशीन बनाने में काम आती है |

कच्चा माल व निर्माण विधि:-

मशीन का बाहरी ढांचा 18 गेज की लोहे की चद्दर से बनता है और अंदर का ड्रम स्टेनलेस स्टील की चद्दर का। इस प्रकार 18 गज की लोहे की काली चद्दर, स्टील की चद्दरें, बिजली की छोटी मोटर, मशीनों के ऊपर लगाए जाने वाले प्लास्टिक या बेकेलाइट के ढक्कन मुख्य सामग्री है, जिसकी खरीद पर अधिक धन लगाना पड़ता है। इसके साथ ही रब्बर सीटें नीचे लगाए जाने वाले उपाय लोहे पर किए जाने वाले रंग रोगन बिजली के स्विच व तार आदि वस्तुओं का प्रयोग भी इन मशीनों के बनाने में किया जाता है। नल की टोटी कब्जे कुंदे और पैरों में लोहे के पॉलिश किए हुए टुकड़े व बिजली के पंखों की पंखुड़ियां आदि भी लगाई जाती हैं। लगभग 1 माह के उत्पादन के लिए यह सामग्री एक साथ खरीदना अच्छा रहता है क्योंकि तीन चार दिन मशीन तैयार होने में लग जाते हैं और बिक्री के बाद पैसा आने में 10-15 दिन लग ही जाते हैं।

Top 24 Manufacturing Business Ideas in India >>

कपड़े सुखाने की मशीन का बाहरी ढांचा 18 गेज की काले लोहे की चद्दर का बेलनाकार होता है। सबसे पहले मशीन के आकार के हिसाब से ड्रम बनाने के लिए तथा ऊपर व नीचे के लिए शेयरिंग मशीन पर लोहे की चद्दर काट ली जाती है। रोलिंग मशीन में ड्रम वाली चद्दर को घुमाकर गोलाकार देते हैं और जोड़कर वेल्डिंग कर दी जाती है। ऊपर व नीचे लगने वाली चद्दर को पावर प्रेस पर डाई द्वारा दबाकर बोल काट लेते हैं और ऊपर वाली चद्दर को बीच में गोल काटकर ढक्कन लगाने की जगह बना ली जाती है। इन तीनों हिस्सों को वेल्डिंग जोड़ कर उनकी सफाई सिंचाई की जाती है। अब इस ड्रम के अंदर बाहर पोस्टिंग चढ़ाकर रंग कर दिया जाता है। रंग का पहला कोट करने के बाद इन ड्रमों को भट्टी में 180 डिग्री तापमान पर 2 घंटे तक पकाते हैं। भट्टी से निकाल कर इसे रेग माल व पानी की सहायता से घिसकर चिकना किया जाता है और अंत में स्प्रे मशीन द्वारा फाइनल पेंट कर दिया जाता है।

अंदर का ड्रम स्टील की चादर का बनाते हैं और यह बाहरी ड्रम से लगभग आधा होता है। इस चद्दर को काटने और जोड़ने की प्रक्रिया तो लोहे की चादर के समान ही है परंतु चादर को गोल करने से पहले दाब प्रेस पर डाई द्वारा इस चादर में छोटे छोटे सैकड़ों छेद कर लिए जाते हैं और इस ड्रम पर रंग भी नहीं किया जाता, अब मशीन के दोनों भागों को असेंबलिंग विभाग में भेज दिया जाता है।

Top 25 Business Ideas in India >>

सबसे पहले बाहरी ड्रम में नीचे की ओर पहिये, तथा बीच में पानी निकालने के लिए टोंटी लगाई जाती है। इसके बाद अंदर की ओर बिजली की मोटर पंखुड़ियां तथा छोटा ड्रम सेट किया जाता है। ऊपर की ओर ढक्कन का स्विच आदि सेट करने के बाद मशीन को टेस्ट किया जाता है और सभी दोष दूर करने के बाद उसे एक बार फिर अच्छी प्रकार चेक करते हैं। घरेलू मशीनों में एक बटा आठ या एक बटा दस हॉर्स पावर की मोटर लगाई जाती है और बड़ी या हैवी ड्यूटी मशीनों में चौथाई हॉर्स पावर की मोटर। तैयार मशीनों पर निर्माता के नाम की प्लेट लगाने के बाद उन्हें कोरोगेटेड शीट के डब्बों में पैक कर और लेबल लगाकर बिक्री के लिए भेज दिया जाता है।

अगली पोस्ट में हम बिजली की प्रेस Electric Iron निर्माण उद्योग के बारे में जानेंगे।

One thought on “How to make Clothes Drying Machine | Small Scale Business Guide in Hindi

Leave a Reply